Saturday, 16 March 2024

The pieces of you that i still hold close

 कभी पूछे वो कि क्या अच्छा लगता है उसमें मुझे,

तो जवाब होगा—

तेरी आँखें… जिनकी पुतलियाँ रोशनी को ऐसे बिखेर देती हैं

जैसे कोई प्रिज़्म जो हज़ारों रंग भर देता हो जीवन में।

तेरी हँसी, जैसे कोई नन्हा बच्चा खिलखिला रहा हो।

तेरे होंठों का यूँ खिसक जाना…

वो जीभ का दाँतों के नीचे हल्के से दब जाना…

तेरे माथे की शिकन, तेरी सिसकन—सब याद है मुझे।

तेरा हाथों से खिलाना… प्यार से हाथ सहलाना…

वो सब कुछ आज भी याद है मुझे।

तू मुझ-सी न बन, तू तुझ-सी ही रह।

मेरा मेरा होना… और तेरा तेरा होना—यही तो सब कुछ है।

तेरा लड़कपन, तेरे नखरे,

तेरे मुखड़े जो उखड़े, वो भोलि सी सूरत—मैं सब याद रखती हूँ,

यही सब तुझे तुझ-सा बनाता है।

तभी तो याद आता है, हर एक पल

भुला देने को यह मन को मनाता है…

पर जब भी रात आती है,

तू धीरे-से लौट आती है… मुझे इतना सताती है।

ये दिल रोता है, बिलखता है…

पर पर के पार नहीं जा सकता।

तुझे क्या याद है वो दिन…

जब हम-तुम साथ थे हरदम?

या फिर इस याद में बस मैं ही हूँ…?